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🌺 माँ दुर्गा और महिषासुर की कहानी



🌺 माँ दुर्गा और महिषासुर की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वरदान माँगा कि कोई भी देवता या पुरुष उसे पराजित न कर सके।

वरदान पाकर महिषासुर बहुत शक्तिशाली और अहंकारी हो गया। उसने देवताओं और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर दिया और स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिया।

सभी देवता चिंतित होकर भगवान विष्णु, भगवान शिव और ब्रह्माजी के पास पहुँचे। तब सभी देवताओं की शक्तियाँ एक साथ प्रकट हुईं और उनसे एक दिव्य देवी का जन्म हुआ। उनके तेज से पूरा संसार प्रकाशमय हो गया।

वही देवी थीं **माँ दुर्गा**। उनके अनेक हाथों में देवताओं द्वारा दिए गए दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे और वे सिंह पर सवार थीं।

माँ दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। कई दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर कभी भैंसे, कभी सिंह और कभी मनुष्य का रूप धारण करता रहा।

अंत में माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया। देवताओं और मनुष्यों ने माँ की जय-जयकार की।

**“जय माता दी! जय माँ दुर्गा!”**

कहा जाता है कि माँ दुर्गा बुराई पर अच्छाई, अहंकार पर धर्म और अधर्म पर सत्य की विजय का प्रतीक हैं। इसी विजय की स्मृति में **नवरात्रि और दुर्गा पूजा** जैसे पर्व श्रद्धा से मनाए जाते हैं।

**माँ दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा करें और सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें। 🙏🌺**


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