ज़रूर। **“चक्की चक्की नमक निकाल”** पर एक मज़ेदार हिंदी कहानी:
### चक्की चक्की नमक निकाल
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब लेकिन बहुत मेहनती लड़का रहता था। उसके घर में खाने तक के लिए पैसे नहीं थे।
एक दिन रामू जंगल से लकड़ियाँ लेकर लौट रहा था। रास्ते में उसे एक बूढ़ी दादी मिलीं। दादी बहुत भूखी थीं। रामू ने अपनी थोड़ी-सी रोटी भी उन्हें दे दी।
रामू की दयालुता देखकर दादी मुस्कुराईं और उसे एक छोटी-सी **जादुई चक्की** दी।
दादी ने कहा, “बेटा, यह कोई साधारण चक्की नहीं है। इसे रखकर कहना—**‘चक्की चक्की नमक निकाल’**, तो यह नमक निकालने लगेगी। जब नमक बंद करवाना हो तो कहना—**‘चक्की चक्की नमक रोक’**।”
रामू चक्की घर ले आया। उसने जैसे ही कहा, “चक्की चक्की नमक निकाल!”
चक्की से सफेद-सफेद नमक निकलने लगा। रामू बहुत खुश हुआ। उसने तुरंत कहा, “चक्की चक्की नमक रोक!”
चक्की रुक गई।
अब रामू गाँव में नमक बेचने लगा। धीरे-धीरे उसकी गरीबी दूर हो गई। वह अपनी माँ के साथ खुशी से रहने लगा।
लेकिन गाँव का एक लालची व्यापारी यह देखकर हैरान था कि रामू के पास इतना नमक कहाँ से आता है। उसने किसी तरह चक्की का राज जान लिया और एक रात चक्की चुरा ली।
व्यापारी चक्की लेकर नाव में बैठ गया और समुद्र के बीच पहुँच गया। वहाँ उसने कहा—
“चक्की चक्की नमक निकाल!”
चक्की से नमक निकलने लगा। व्यापारी बहुत खुश हुआ, लेकिन उसे चक्की रोकने वाला मंत्र याद नहीं था!
नमक लगातार निकलता गया। नाव नमक से भर गई और धीरे-धीरे समुद्र में डूबने लगी।
कहा जाता है कि उसी जादुई चक्की की वजह से आज भी समुद्र का पानी खारा है।
**सीख:** लालच हमेशा मुसीबत को बुलाता है, जबकि दया औ
र ईमानदारी इंसान को सुख देती है।

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