अधूरी मुलाकात से पूरी हुई मोहब्बत
एक छोटे से शहर में आरव नाम का लड़का रहता था। वह शांत स्वभाव का था और अपने काम में हमेशा व्यस्त रहता था। उसी शहर में सिया नाम की एक लड़की रहती थी, जो बहुत हँसमुख और मिलनसार थी।
एक दिन आरव बस स्टैंड पर खड़ा बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी तेज हवा चली और सिया के हाथों से कुछ कागज़ उड़कर सड़क पर गिर गए। आरव ने तुरंत दौड़कर सारे कागज़ उठा लिए।
सिया ने मुस्कुराकर कहा,
“थैंक यू… अगर आप नहीं होते तो मेरे सारे कागज़ खो जाते।”
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा,
“शायद आज इन कागज़ों को भी मुझसे मिलना था।”
सिया हँस पड़ी।
उस दिन के बाद दोनों की मुलाकातें धीरे-धीरे बढ़ने लगीं। कभी रास्ते में, कभी चाय की दुकान पर और कभी शहर की छोटी-सी लाइब्रेरी में।
आरव को सिया की मुस्कान पसंद थी और सिया को आरव का सादापन।
एक दिन सिया ने पूछा,
“आरव, अगर मैं कुछ दिनों के लिए इस शहर से चली जाऊँ तो?”
आरव कुछ देर चुप रहा और बोला,
“शहर तो वही रहेगा… लेकिन शायद मेरी दुनिया थोड़ी खाली हो जाएगी।”
सिया की आँखों में हल्की नमी आ गई। उसने धीरे से कहा,
“तो फिर मुझे जाने मत देना।”
आरव ने उसका हाथ थामकर कहा,
“मैं तुम्हें रोकूँगा नहीं… लेकिन अगर तुम चाहो, तो जिंदगी भर तुम्हारे साथ चल सकता हूँ।”
सिया मुस्कुराई और बोली,
“मुझे मंजूर है।”
कुछ महीनों बाद दोनों परिवारों की सहमति से उनकी शादी हो गई।
जिस मुलाकात की शुरुआत कुछ उड़ते हुए कागज़ों से हुई थी, वही मुलाकात जिंदगी भर के रिश्ते में बदल गई।
कभी-कभी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी वहीं से शुरू होती है, जहाँ हम उसकी उम्मीद भी नहीं करते।

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