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भगवान गणेश का सिर कैसे कटा — पौराणिक कहानी

 

### भगवान गणेश का सिर कैसे कटा — पौराणिक कहानी


एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपने शरीर के उबटन से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। वह बालक उनके पुत्र थे—**गणेश जी**।


माता पार्वती ने गणेश जी से कहा, “बेटा, जब तक मैं स्नान कर रही हूँ, किसी को अंदर मत आने देना।”


गणेश जी द्वार पर पहरा देने लगे। तभी भगवान शिव वहाँ पहुँचे। गणेश जी उन्हें पहचान नहीं पाए और बोले, “माता ने किसी को अंदर आने से मना किया है।”


भगवान शिव ने समझाया कि वे पार्वती के पति हैं, लेकिन गणेश जी अपनी माता की आज्ञा पर अडिग रहे। बात बढ़ गई और युद्ध जैसी स्थिति बन गई। अंत में भगवान शिव ने क्रोध में अपने त्रिशूल से **गणेश जी का सिर अलग कर दिया**।


जब माता पार्वती को यह पता चला तो वे बहुत दुखी और क्रोधित हुईं। उन्होंने भगवान शिव से गणेश जी को जीवित करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि जो जीव उन्हें सबसे पहले मिले, उसका सिर लेकर आएँ।


गणों को एक **हाथी का बच्चा** मिला। वे उसका सिर लेकर आए। भगवान शिव ने हाथी का सिर गणेश जी के शरीर पर लगाकर उन्हें पुनः जीवित कर दिया।


इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि संसार में किसी भी शुभ कार्य से पहले **सबसे पहले गणेश जी की पूजा** की जाएगी। इसी कारण उन्हें **प्रथम पूज्य** कहा जाता है। 🙏🐘


**जय

 श्री गणेश!** 🙏

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